किरदारों को निभाने में वक्त जाया न करो
बुझ दिलो की तरह यूँ खुद को छुपाया न करो
यहमियत रखो सपनो की ,सपनो को यूँ जाया न करो
बेबस होगा तेरा जश्न ,यूँ महफिले सजाया न करो
काफिले पे कितने मगरूर थे तुम ,काफिला यूँ पीछे छोड़ आया न करो
समंदर में ढुंढ़ो निशाँ अपने , खोज में नहर का पानी यूँ ही बहाया न करो
---निशाँ
कोणत्याही टिप्पण्या नाहीत:
टिप्पणी पोस्ट करा